मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है,

तेरी सूरत को माँ मैंने दिल में बसाया है.....

चाँद और तारों से धरती के नजारो से,

आसमा के तारो से तेरा भवन सजाया है,

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है....

कोयल कू कू बोले मेरा मन यूँ डोले,

आत्मा का तन डोले और मन हर्षसाया है,

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है....

मैया अब ना करो देरी जो भक्ति करे मेरी,

जो भी शरण आया तूने अपना बनाया है,

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है....

मैया महिमा तेरी न्यारी देखो फूलों से सजी है प्यारी,

आसमा के तारो से तेरा भवन सजाया है,

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है....

पान सुपारी नारियल तेरी भेट चढ़ाऊँगी,

हलवे चने का मैया तेरा भोग लगाऊँगी,

आसमा के तारो से तेरा भवन सजाया है,

मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।