बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज रात मने सपना आया, तेरी होये रहीजय जयकार,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार.....

ना चाहिए तेरी कोठी बंगला ना चाहिए तेरी कार,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार....

ना चाहिए तेरी इडली रे ढोसा ना चाहिए पकवान,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार....

ना चाहिए मोहे संग की सहेली ना चाहिए रिश्तेदार,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार.....

ना चाहिए तेरी रेशमी साड़ी ना चाहिए सोलह श्रृंगार,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार.....

ना चाहिए तेरे सेर सपाटे मोहे दर्श करा एक बार,

बलम मोहे ले चल रे मैया के दरबार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।