मत लेना अवतार सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मत लेना अवतार सांवरे छाया कलयुग भारी रे,

चाल बदल गई हवा बदल गई बदल गया इंसान रे....

किस के रथ पर बैठोगे और कोई ना अर्जुन पावे रे,

किसका थोड़े घमंड सांवरे सारे तो दुर्योधन रे,

मत लेना अवतार.....

कोई मिले ना मात यशोदा कैसे माखन खाओगे,

राधा जैसा प्रेम रहा ना कैसे रास रचोओगे,

मत लेना अवतार.....

नहीं है दोस्त सुदामा जैसे छुरी पीठ में मार रहे,

किसकी मटकी फोडोगे और कोई ना दूध पिलावे रे,

मत लेना अवतार.....

किसका चीर बढ़ओगे अब रोज ही चीर उतरते रे,

नारी की कोई कदर रही ना सारे अब दुशासन रे,

मत लेना अवतार.....

भाई भाई का प्यार रहा ना साला धाक जमाबे रे,

खाली हाथों बहन चली जा साली सूट सिमावे रे,

मत लेना अवतार.....

कुए भी सुने ताल भी सुने नहीं कदम के पेड़ रहे,

कैसे मुरली बजाओगे अब घर-घर डीजे बाज रहे,

मत लेना अवतार.....

कहनी थी जो पहली सांवरे आगे मर्जी तेरी रे,

तेरी लीला को तू ही जाने हमारे बस की कुछ ना रे,

मत लेना अवतार सांवरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।