तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

टीटूडी टीटावत बोली भारत मंड गयो भारी रे,

भारत म भंवरी का अंडा बचा लिया बनवारी रे,

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे....

मंझारी सूत दियो अगन में भांडा घडत कुम्हारी रेे,

पांचू भांडा काचा रेग्या खेलत फिरत मंझारी रे,

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे....

द्रोपद चीर दुशासन खेंच्यो बा पंडवा की नारी रे,

खेंचत खेंचत हारयो दुशासन बढ़ ग्यों चीर हजारी रे,

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे....

इन्द्र कोप कियों बृज ऊपर बरखा बरसे भारी रे,

बांये नख पर गिरवर धारयो बचा लयी बृज सारी रे,

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे....

ध्रुव तारे प्रहलाद उबारे नरसी की हुण्डी स्वीकारी रे,

दोय कर जोड़ "शिवदत्त" जी गावे राखों लाज हमारी रे,

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले सांवरा गिरधारी रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।