सुनो सुनो बिनती माँ मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुनो सुनो सुनो सुनो,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

मुझको तू ठुकराना ना,

भटके को भटकाना ना,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी......

झर झर बहते आँख से आंसू,

रोता है मन मेरा,

रोता है मन मेरा,

सारी दुनिया छोड़ के मैंने,

द्वार है ढूँढा तेरा,

द्वार है ढूँढा तेरा,

आ लाखो तूने तार दिये,

बच्चो पे सुख वार दिये,

मुझको भी बिसराना ना,

भटके को भटकाना ना,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी......

सत्य करम और धीरज मन का,

तुझसे है सब लेना,

तुझसे है सब लेना,

खाली झोली तरस रही है,

टाल ना मुझको देना,

टाल ना मुझको देना,

ओ दुःख सुख तेरे हाथो में,

करदे उजाला रातो में,

करना कोई बहाना ना,

भटके को भटकाना ना,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी......

तेरे ख़ज़ानों में जग जननी,

तीन लोक की माया,

तीन लोक की माया,

सृष्टि के हर जीव ने तुझसे,

जो माँगा सो पाया,

जो माँगा सो पाया,

ओ मैं भी खड़ा हूँ दर तेरे,

दुःख संताप तू हर मेरे,

और मुझे तरसाना ना,

भटके को भटकाना ना,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

मुझको तू ठुकराना ना,

भटके को भटकाना ना,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी,

सुनो सुनो बिनती माँ मेरी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।