एक गिलहरी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

एक गिलहरी बार-बार सागर में पूँछ भिगावे...

राम जी ने पूछा –

“गिलहरी क्या कर रही हो ?”

बड़े नुकीले पत्थर प्रभु जी....

तेरे पाँव में न चुभ जावें...

बालू आपके राह को प्रभुजी ..कितना सुगम बनावें !!

बालू आपके राह को प्रभुजी ..कितना सुगम बनावें !!

देख वानरों की सेवा महान

मेरे दिल में जगे अरमान!

देख वानरों की सेवा महान

मेरे दिल में जगे अरमान!

मैं तो पत्थर उठा नहीं पायी

तो बालू ले आयी..

तेरी सेवा करूँ मैं मेरे राम

मेरे दिल में जगे अरमान

मैं तो पत्थर उठा नहीं पायी

तो बालू ले आयी..

अब प्रभु श्री राम गिलहरी से प्रसन हो कर बोलते हैं -

“तेरी यह सेवा ना भूले रघुराई

युगों युगों कथा तेरी जायेगी सुनायी… जायेगी सुनायी!”

“तेरी यह सेवा ना भूले रघुराई

युगों युगों कथा तेरी जायेगी सुनायी!!”

तेरा रघुकुल पे है यह एहसान..

तेरा रघुकुल पे है यह एहसान..

तू तो पत्थर उठा नहीं पायी तो बालू ले आई !!

तू तो पत्थर उठा नहीं पायी तो बालू ले आई !!

मंजीत सिंह

9887203444

पैड प्लेयर @ अजमेर, राजस्थान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।