मईया तेरा सहारा सदा चाहिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले,

मईया तेरा सहारा सदा चाहिए,

चाँद तारे गगन में दिखे ना दिखे,

मुझको तेरा नज़ारा सदा चाहिए,

आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....

जहाँ खुशियां है कम और ज्यादा है गम,

जहाँ देखो वही पे भर्म ही भर्म,

तेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले,

मेरे घर में उजाला सदा चाहिए,

आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....

मेरी धीमी है चाल पथ है विशाल,

हर कदम पे है मालिक मुझे तू संभाल,

पैर मेरे ये दोनों चले ना चले,

मुझको तेरा ये साथ सदा चाहिए,

आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।