माँ पतित पावनी है

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( श्री नर्मदाय नमो प्रातः

नर्मदाय नमो निषे

नमस्ते नर्मदे देवी

त्राहिमाम भव सागरः )

मां पतित पावनी है, मां जगत तारणी हैं,

माँ ही रेवा, माँ ही गंगा, तमस हारिणी है....

अमरकंटक से धारा, निकली हैं रेवा

शिवशंकर की प्यारी, पुतरी हैं रेवा

पूरब से पश्चिम बहती, कुवांरी हैं रेवा

ये ही सबकी मां नर्मदा,

अमृत वाहीणी हैं……

चर और अचर का पालन, करती हैं सर्वदा

नर नारी के मद को, हरति हैं नर्मदा

दर्शन से सबके पाप, धोती हैं नर्मदा

ये ही सबकी माँ रंजना, मंदाकिनी हैं…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।