बनोगे राधा तो यह जानोगे के कैसा प्यार है मेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,

के कैसा प्यार है मेरा,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,

के कैसा प्यार है मेरा,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

क्या होती प्रतीक्षा है, की पीड़ा होती है,

कितना जलता है दिल कब आँखे रोटी है,

बहेंगे आँसू, बहेंगे आँसू, तब यह जानोगे,

की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

जब कोई सुनेगा ना, जब कोई सुनेगा ना,

तेरे मान के दुखड़े जब ताने सुन सुन के होंगे दिल के टुकड़े,

सुनोगे ताने तब यह जानोगे, सुनोगे ताने तब यह जानोगे,

की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

पनघट मेी मधुबन मेी वो इंतेजर करना,

आए श्याम तेरी खातिर वो घुट घुट के मारना,

करोगे इंतजार जानोगे, करोगे इंतजार जानोगे,

की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

तुम याद ना आया करो, तुम याद ना आया करो,

याद आने से पहले तुम ना जया करो,

तुम याद ना आया करो, तुम याद ना आया करो,

अब एक तमन्ना है, गर फिर से जानम मिले,

मई श्याम बनू तेरा तू राधा बन के जिए,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,

के कैसा प्यार है मेरा,

बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।