तुम अपने रंग में रंग लो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

हे माँ दुर्गे हा अहा हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

हे माँ दुर्गे हा हा हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे.....

जो दुराचारी थे माँ उनका,

वध तूने किया माँ सदा है,

अस्त्रों शस्त्रों से है तू सुशोभित,

माँ तू ही तो बलप्रदा है,

तेरे ही चरणों में है,

तीनों लोकों का संगम,

तेरी भक्ति ही सत्य है,

सब मिथ्या है,

सब मिथ्या है,

तेरी भक्ति ही सत्य है सब मिथ्या है,

सब मिथ्या है हा हा,

सब मिथ्या है सब मिथ्या है,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

हे माँ दुर्गे हा हा हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे.....

माँ तेरे दम से है ये जीवन,

सुख का आधार सबका ही तू है,

इस धरती से उस अम्बर तक,

जो भी श्रृंगार है माँ वो तू है,

रंग रंगीले रंगों से,

माँ रच दे जीवन सबका,

मानव ही तेरी सबसे,

उत्तम रचना उत्तम रचना,

मानव ही तेरी सबसे उत्तम रचना उत्तम रचना,

उत्तम रचना उत्तम रचना हा हा,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

हे माँ दुर्गे हा हा हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

हे माँ दुर्गे हा हा हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,

तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।