राधे मोरी बंसी कहा खो गयी

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,

कोई ना बताये और शाम हो गयी,

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,

बिन बंसी के कैसे घर जाऊ बंसी प्राण से प्यारी,

बाबा तो मोहे कशु न कहे गो दाऊ पड़े गो बाहरी,

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी

तूने तो कही नही चुराई इतना मुझे बता दे,

बंसी के बदले में मुझसे ठुमक ठुमक नाच वाले,

गवालो के संग खेल रहा था यही कही खोगई,

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,

तूने मेरी मटकी फोड़ी मैं बंसी तोड़ी गी,

एक एक मटकी के बदले मैं दस दस दरवाये लुंगी,

फिर मैं तुज्को नाच नाचू तब मैं बंसी दूंगी,

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी

कान्हा का हाल देखके राधा हसने लागी,

बंसी दिखा दिखा के राधा दूर दूर से बागन लगी,

राधे श्याम की जोड़ी देखो सबके मन को भाह गई,

राधे मोरी बंसी कहा खो गयी.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।