ज्ञान मोहे दीजो हे काली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

माली कै नै बाग लगायो, पर्वत हरियाली,

रे हाथ ने पुष्पन की माला, द्वार खड्या माली,

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

जरी का दुपट्टा चीर शीश पर सोहे जंगाली,

तेरै नाकन में नकबेसर सोहे कर्ण फूल बाली,

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

सवा पहर के बीच भवन में खप्पर भर वाली,

कर दुष्टन का नास भगत की करना रखवाली,

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

चाबत नगर पान होठ पर छाय रही लाली,

तनै गावे मोतीलाल कालका कलकत्ते वाली,

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।