अब के नवरात मेरे अंगना पधारो

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अब के नवरात मेरे,

अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,

अंगना पधारो मेरे संकट निवारो,

अंगना पधारो मेरे संकट निवारो,

संकट निवारो मेरी बिगड़ी संवारो,

जगदम्बे भवानी,

अब के नवरात मेरें,

अंगना पधारो जगदम्बे भवानी....

पहली नवरात्रि मेरे,

पाप नाश करना,

दूसरी नवरात्री कष्ट,

संताप हरना,

तीसरी नवरात्री भरम,

मन के मिटाना,

चौथी नवरात्री मेरी,

किस्मत चमकना,

पांचवी नवरात्री दोष,

अवगुण बिसारो,

जगदम्बे भवानी,

अब के नवरात मेरें,

अंगना पधारो जगदम्बे भवानी....

छठी नवरात्री छुटकारा,

हो मोह जाल से,

सातवीं नवरात्री गाऊं,

महिमा सुरताल से,

अष्टमी को आना,

रूप अष्टभुजी धारकर,

नवमी को निष्काम,

भक्ति का देना वर,

तुम हो तारणहार मैया,

मेरी भी तारो,

जगदम्बे भवानी,

अब के नवरात मेरें,

अंगना पधारो जगदम्बे भवानी....

करती हो मैया सबकी,

पूरी मनोकामना,

‘लख्खा’ के दिल में तेरे,

दर्शन की भावना,

टूटे ना मेरे विश्वास,

की ये डोरी,

तरस कान मेरे,

सुनने को लोरी,

अपने सरल को बेटा,

कहके पुकारो,

जगदम्बे भवानी,

अब के नवरात मेरें,

अंगना पधारो जगदम्बे भवानी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।