महाकाल की महाकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

या देवी सर्वभूतेषु

शक्ति रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै

नमस्तस्यै नमो नमः

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली...

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली....

एक चोटी पे हैं बैठे,

श्री खंड महादेव,

एक चोटी पे हैं बैठी,

मेरी भी महाकाली,

ॐ जयंती मंगला काली,

भद्रकाली कपालिनी,

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,

स्वाहा स्वधा नमोस्तुते,

ॐ जयंती मंगला काली,

भद्रकाली कपालिनी,

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,

स्वाहा स्वधा नमोस्तुते,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली....

सर्व मंगल मांगल्ये,

शिवे सर्वार्थ साधिके,

शरण्ये त्र्यंबके गौरी,

नारायणी नमोस्तुते,

सर्व मंगल मांगल्ये,

शिवे सर्वार्थ साधिके,

शरण्ये त्र्यंबके गौरी,

नारायणी नमोस्तुते,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली,

हे महाकाली दुर्गे काली,

महाकाल की महाकाली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।