सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया,

हो रही जय जयकार....

का रंग चुनरी का रंग गोटा,

का रंग फूलन हार,

लाल रंग चुनरी लाल रंग गोटा,

लाल रंग फूलन हार,

सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया,

हो रही जय जयकार....

का रंग बिंदिया का रंग एरंग,

का रंग नथुनी डार,

लाल रंग बिंदिया लाल रंग एरंग,

लाल रंग नथुनी डार,

सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया,

हो रही जय जयकार....

का रंग चरण महावर का रंग,

का रंग सिंघ सवार,

लाल रंग चरण महावर लाल रंग,

लाल रंग सिंघ सवार,

सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया,

हो रही जय जयकार....

का रंग राजेन्द्र नरियल लाये,

का रंग पूजन थार,

लाल रंग राजेंद्र नरियल लाये,

लाल रंग पूजन थार,

सिंघ पे चढ़के आ रहीं मैया,

हो रही जय जयकार....

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।