पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

किसने तो मैया तेरा भवन बनायो,

किसने चवर ढुरायो देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

पांचो पांडव मैया भवन बनायो,

अर्जुन चवर ढुरायो देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

के गज गहरी मैया नीम रे खुदाई,

तो के गज को यामे गारों देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

नौ गज गहरी मैया नीम रे खुदाई,

तो दस गज को यामे गारो देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

नंगे नंगे पैरों मैया अकबर आयो,

सोने का छत्र चढ़ायो देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

नंगे नंगे पैरों मैया ध्यानू आयो,

अपनों शीश चढ़ायो देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

सुमीर मैया तेरो यश गायो,

तो अटल छत्र जयकारों देवी मैया को,

पर्वत पर बजे नगाड़ों देवी मैया को....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।