ममता का खज़ाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपने बच्चों से मिलने को मैया धरती पे देखो आती है,

ममतामई ममता का खज़ाना आकर यहाँ पे लुटाती है,

अपने बच्चों से मिलने को मैया....

आते ही नवरात्रे बच्चों से मिलने को होती बेकरार माँ,

इस दिन का बेसब्री से करती रहती है इंतज़ार माँ,

करके आई मैया सफर लेने बच्चों की खबर,

छोड़ ऊँचे पर्वतों को माँ...

आकर धरा पर माँ और बेटी के रिश्ते को मैया निभाती है,

अपने बच्चों से मिलने को मैया धरती पे देखो आती है......

( जयकारा शेरावाली दा.. बोलो सांचे दरबार की जय )

ओढ़ लाल रंग माँ चुनार करके आई शेर की सवारी,

सज धज के शेरावाली माँ आज लग रही है बड़ी प्यारी,

भैरो बाबा और बजरंग मैया जी के आये संग,

रखवाली करते मैया की....

अपने बच्चों के संग बैठ कर माँ दरबार अपना लगाती है,

अपने बच्चों से मिलने को मैया धरती पे देखो आती है....

नौ दिन का त्यौहार माँ मिलके सबके साथ है मनाती,

लेकर बिदाई बच्चों से दसवीं को ये चली जाती,

आंसुओं की बहती धारे रोते सभी माँ के प्यारे,

कुंदन माँ की जुदाई माँ..

मैं फिर आउंगी मिलने को तुमसे बच्चों को माँ समझाती है,

अपने बच्चों से मिलने को मैया धरती पे देखो आती है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।