रख ज्योतिन वारे ते

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॥ पावन पाठ ॥

रख ज्योतिन वारे ते ,पांणे पूरी कंदो

आ मुंहिंजो लाल, लजपाल,रखपाल सभजो ।

रख ज्योतिन---------

काई मुसीबत ,अचे जे अगिया

वेठो लाल आ घबराई मता

रख पले वारे ते-पांणे पुरी कंदो

रख ज्योतिन वारे ते । रख लहरून वारे

जेकाभी दिल में तुहन्जे गाल्ह आहे

जाणीन्दो लाल हर हाल आहे

रख घोड़े वारे ते-पांणे पुरी कन्दो

अजय मुकेश तू रख लाल ते

अवली माँ सवली डिस किय तो करो

रख झंडे वारे ते-पांणे पुरी कंदो॥

सिंगर SAM

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।