मैं दीवानी हाँ लाडी सरकार दी

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॥ पावन पाठ ॥

मैं दीवानी हाँ लाडी सरकार दी,

लोकी मेनू कमली कहंदे,

तन मन लाया नाल तेरे दुःख सब दे सेहन्दे,

मैं दीवानी हाँ लाडी........

हर गल कही तेरी रब वि नही मोड़ दा,

तूतिया तारा साईं दिला दिया जोड़ दा,

कथो लब दा था था साईं तेरे दिल विच रहंदे,

मैं दीवानी हाँ लाडी.............

सोहने धरती नकोदर साईं जिथे बस दे,

रोंदे होए चहरे दरो सब तेरे हसदे,

हर गल तेरी संजिया दे नाल रब कोलो जा बेह्न्दे,

मैं दीवानी हाँ लाडी..............

गुण तेरे लिखे साईं कहंदा काटो मलका,

जय मस्ता दी मणि हर था पुकार दा,

तेरे जीकर हुँदै था था गल्लां सब सचिया कहंदे,

मैं दीवानी हाँ लाडी............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।