एक फकीरा माँ के दर पे

कुमार विशु
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक फकीरा माँ के दर पे,

एक फकीरा माँ के दर पे,

हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....

एक फकीरा माँ के दर पे,

हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....

ब्रम्हा विष्णु शिव शंकर जी माँ की महिमा गाते,

ब्रम्हा विष्णु शिव शंकर जी माँ की महिमा गाते,

ऋषि मुनि ज्ञानी और ध्यानी माँ को शीश नवाते,

ऋषि मुनि ज्ञानी और ध्यानी माँ को शीश नवाते,

माता ज्वाला की ज्योति का भक्तो अजब नजारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ....

बड़े बड़े दानी महादानी माँ को रोज है ध्याते,

बड़े बड़े दानी महादानी माँ को रोज है ध्याते,

मन की इच्छा पूरी करते मन चाहा फल पाते,

मन की इच्छा पूरी करते मन चाहा फल पाते,

एक नहीं जहाँ लाखो करोडो झुकता है जग सारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....

किरपा करती मात भवानी जो दर माँ के जाए,

किरपा करती मात भवानी जो दर माँ के जाए,

जाने कितने दीवाने तर गए माँ दर शीश झुकाये,

जाने कितने दीवाने तर गए माँ दर शीश झुकाये,

भव सागर से अब मैया सबको पार उतारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा.....

एक फकीरा माँ के दर पे,

हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,

जय जय जय माँ जय जय जय माँ,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,

माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।