माँ का सज्या है दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

लाखो लाख बधाईयाँ ने घर बीच रौनक लायी ने,

लाखो लाख बधाईयाँ ने घर बीच रौनक लायी ने,

हो रही माँ दी जय जयकार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने....

कोई खुशियां ने बीच माँ दे दर ते नाच नाच हाजरी आवे,

दर ते नाच नाच हाजरी आवे दर ते नाच नाच हाजरी आवे,

कोई दुखड़ा बरिया अम्बे माँ नु रो रो हाल सुनावे,

माँ नु रो रो हाल सुनावे, माँ नु रो रो हाल सुनावे,

कोई खुशियां ने बीच माँ दे दर ते नच नच हाजरी आवे,

कोई दुखड़ा बरिया अम्बे माँ न्यू रो रो हाल सुनावे,

सबनु मिलदा मैया दा प्यार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने....

फ़रियाद सुनी मैया ने आ के आ के घर बीच फेरा पाया,

आ के घर बीच फेरा पाया आ के घर बीच फेरा पाया,

त्रिकूट पर्वत तो आ के साडे घर बीच डेरा लाया,

साडे घर बीच डेरा लाया साडे घर बीच डेरा लाया,

फ़रियाद सुनी मैया ने आ के आ के घर बीच फेरा पाया,

त्रिकूट पर्वत तो आ के साडे घर बीच डेरा लाया,

रज रज कर लो आज दीदार लाखो लाखो बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने....

कृपा होई दाती महिमा मुदित कुमार ने गयी,

महिमा मुदित कुमार ने गयी महिमा मुदित कुमार ने गयी,

सबदी ऐसा पूरी कर दी जिसने भी है आस लगाई,

जिसने भी है आस लगाई जिसने भी है आस लगाई,

कृपा होई दाती महिमा मुदित कुमार ने गयी,

सबदी ऐसा पूरी कर दी जिसने भी है आस लगाई,

केवल एक साची सरकार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,

माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।