मईया मईया शेरावाली मईया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( दुखो में बिखरी हुई जिन्दगी, दुखो में बिखरी हुई जिन्दगी,

उस वक्त सवर जाती है मुझे मेरी उम्मीद में, मुझे मेरी उम्मीद में,

जब मेरी माँ मेरी माँ, मेरी माँ नजर आती है। )

हे जगदम्बे मात भवानी तुमको नमन माँ जग कल्यानी,

थाम लो मेरी डोर भवानी ले चल सुख की ओर भवानी,

मागती है ये दुनिया एक दाती हो तुम राह असान सबकी बनाती हो तुम,

माँ...

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये कर दे हमपे कर्म माँ पहाड़ा वालीये,

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये मईया मईया, आशा पुरण मईया,

मईया मईया, आशा पुरण मईया,

मईया मईया, माँ विजासन मईया,

मईया मईया, माँ विजासन मईया....

सुरज चान्द्रा और सितारे तेरी दया से रौशन सारे,

कण-कण धरती और नजारे सब पर माँ उपकार तुम्हारे,

रूप पावन तेरा महा माई हो तुम सारे ब्राहमाण्ड में समाई हो तुम,

माँ....

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये कर दो हमपे कर्म माँ पहाड़ा वालीये,

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये....

आस यही है मेरे मन कि खुशिया बनो माँ घर आगन कि,

और क्या माँऊ है जगजननी सेवा करू तेरे चरणन की,

है विश्वास मुझको साथ दोगी सदा मन में बंधर के ज्योती रहोगी सदा,

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये कर दे हमपे कर्म माँ पहाड़ा वालीये

हे जगदम्बे मात भवानी तुमको नमन माँ जग कल्यानी,

थाम लो मेरी डोर भवानी ले चल सुख की ओर भवानी,

मागती है ये दुनिया एक दाती हो तुम राह असान सबकी बनाती हो तुम,

माँ...

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये कर दे हमपे कर्म माँ पहाड़ा वालीये,

मईया शेरा वालीये माँ ज्योतावालीये मईया मईया, आशा पुरण मईया,

मईया मईया, आशा पुरण मईया,

मईया मईया, माँ विजासन मईया,

मईया मईया, माँ विजासन मईया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।