साँवरे संग मन लागा

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लागा रे लागा रे लागा, सांवरे के संग मन लागा,

चुनरी ओढ़ी श्याम रंग की, बांधा उसके नाम का धागा,

लागा रे लागा रे लागा, सांवरे के संग मन लागा....

जब से प्रीत लगी मोहन से, लोभ मोह सब छूटा मन से,

रहूं मैं खोई याद में उसकी, नाम जपु दिन रात लगन से,

भक्ति का रंग ऐसा दमका जैसे सोने पे सुहागा,

लागा रे लागा रे लागा, सांवरे के संग मन लागा....

सूरदास की लगन को देखो ,कृष्ण को अन्तर घट में पाया,

राधा प्रेम की इष्ट बनी और मीरा को जन जन ने गाया,

उसको पाने की लगन में ध्रुव ने झूठे जग को त्यागा,

लागा रे लागा रे लागा, सांवरे के संग मन लागा....

श्याम लगन की रीत निराली, अमृत से भर दे घट प्याली,

जिसके मन में लगन की ज्योति उसकी रातें भी उजियारी,

जिसके हृदय शाम रतन फिर वो काहे को रहे अभागा,

लागा रे लागा रे लागा, सांवरे के संग मन लागा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।