प्रथम भगति संतन कर संगा

पारंपरिक
अन्य मंत्र विविध भजन mantra
॥ पावन पाठ ॥

प्रथम भगति संतन कर संगा |

दूसरि रति मम कथा प्रसंगा ||

गुर पद पंकज सेवा तीसरि भगति अमान |

चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तज गान ||

मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा |

पंचम भजन सो बेद प्रकासा ||

छठ दम सील बिरति बहु करमा |

निरत निरंतर सज्जन धर्मा ||

सातव सम मोहि मय जग देखा |

मोते संत अधिक करि लेखा ||

आठव जथा लाभ संतोषा |

सपनेहु नहिं देखहि परदोषा ||

नवम सरल सब सन छनहीना |

मम भरोस हिय हरष न दीना ||

नव महुं एकउ जिन्ह कें होई ।

नारि पुरूष सचराचर कोई ॥

मम दरसन फल परम अनूपा |

जीव पाइ निज सहज सरूपा ||

सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम |

ते नर प्राण समान मम जिन के द्विज पद प्रेम ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।