मंदिर में जली है माँ की ज्योति

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ जय माँ लगाओ जय कारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा.....

मंदिर में मैया का दीपक जलाया,

हां फूलों से दरबार सजाया रोशन हुआ जग सारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा....

मंदिर में माँ के शीश झुकाए,

मन की मुरादे माँ से पाए खोला है माँ ने भंडारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा...

मंदिर में माँ के दर्शन पा लो,

झूमो नाचो खुशियां मनालो समय मिले ना दोबारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा...

भक्तों पर है माँ बलिहारी,

माँ की महिमा बड़ी निराली जाग है संसार सारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा....

मैया सब पर कृपा बनाये,

रोती हुई तकदीर बनाये चमका है किस्मत का तारा,

मंदिर में जली है माँ की ज्योति लगाओ माँ का जयकारा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।