भोले ने जिसे चाहा दीवाना बना डाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( व्याघंबरम भस्मामबरम,

जटा जूट लिबास,

आसान जमाए बैठे है,

कृपा सिंधु कैलाश । )

भोले ने जिसे चाहा,

दीवाना बना डाला,

एक मस्त नजर डाली,

मस्ताना बना डाला,

महाकाल ने भक्तो को,

दीवाना बना डाला....

( अकाल मृत्यु वो मरे,

जो काम करे चांडाल का,

काल उसका क्या बिगाड़े,

जो भक्त हो महाकाल का । )

भोलें ने जिसे चाहा,

दीवाना बना डाला,

एक मस्त नजर डाली,

मस्ताना बना डाला,

महाकाल ने भक्तो को,

दीवाना बना डाला....

( भोले ने अपने भगतो को,

क्या कुछ नहीं दिया,

जो मांगा फल भक्तो ने,

प्रभु तुमने दान किया,

खुद पीते है जहर का प्याला,

मेरे भोले नाथ,

और भक्तो को अपने बाबा ने,

अमृत दान दिया । )

भोलें ने जिसे चाहा,

दीवाना बना डाला,

एक मस्त नजर डाली,

मस्ताना बना डाला,

महाकाल ने भक्तो को,

दीवाना बना डाला....

( एक बिलिपत्रम एक पुष्पम,

एक लोटा जल की धार,

दयालु रीझ कर देते है,

चंद्र मौली फल चार । )

महाकाल के दर 'अंकित',

भक्तो की भीड़ लगी देखी,

हर एक की झोली,

बाबा के दर पर भरी देखी,

भोलें ने जिसे चाहा,

दीवाना बना डाला,

एक मस्त नजर डाली,

मस्ताना बना डाला,

महाकाल ने भक्तो को,

दीवाना बना डाला....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।