मैं हूँ कृष्ण का दीवाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( वृन्दावन सोवन नहीं नंद गाम सो गाम,

बंसी वट सो वट नहीं श्री कृष्ण नाम सो नाम,

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ। )

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ,

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ,

मैं कृष्ण बोलता हु मैं कृष्ण बोलता हूँ....

श्री कृष्ण ही तो वेद और गीता का सार है,

श्री कृष्ण ही तो राधा और मीरा का प्यार है,

दिल में बसा के कृष्ण की तस्वीर ढूंढ़ता हूँ,

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ....

श्री कृष्ण नाम मेरी श्वासो में रम रहा है,

श्री कृष्ण नाम लेकर कोई ना गम रहा है,

जो सो रहे मुसाफिर उनकी आंखे खोलता हूँ,

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ....

श्री कृष्ण ही तो मेरे इस मन का मीत है,

संगीत कृष्ण मेरा और कृष्ण गीत है,

में गीत मधुर गाकर रस कृष्ण घोलता हूँ,

मैं हूँ कृष्ण का दीवाना मैं कृष्ण बोलता हूँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।