इस जीवन का कोई भरोसा नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे घनश्याम आकर लगा लो गले,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं.....

बड़े नाजौ से बाबुल ने पाला मुझे,

डोली में बिठा कर के भेजा मुझे,

आगे किस्मत में क्या है पता कुछ नहीं,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं....

घर में सासुल मिली घर में ससुरा मिले,

आके बेटी समझ कर के रखा मुझे,

आगे कैसे रखेंगे पता कुछ नहीं,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं...

घर में जितनी मिली घर में जेठा मिली,

छोटी बहना समझ कर के रखा मुझे,

आगे कैसे रखेंगे पता कुछ नहीं,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं....

घर में देवर मिले घर में ननदुल मिले,

बड़ी भाभी समझ मान रखा मुझे,

आगे कैसे बोलेंगे पता कुछ नहीं,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं....

घर में पति मिले परमेश्वर मिले,

जीवनसाथी समझ कर के रखा मुझे,

आगे कैसे रखेंगे पता कुछ नहीं,

इस जीवन का कोई भरोसा नहीं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।