हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं,

महफिल में जुड़ा रहना संतों से सीख जाएं,

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं॥

सुख दुख में हंसना रोना है काम है कायरों का

दोनों में मुस्कुराना संतो से सीख जाएं,

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं॥

झंझट से भाग जाना सब लोग बताते हैं,

झंझट में बच के रहना संतो से सीख जाएं,

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं॥

मरने के बाद मुक्ति सब लोग बताते हैं,

जीते जी मुक्त होना संतो से सीख जाएं,

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं॥

दुनिया के लोग दौलत पा करके मुस्कुराते,

अरे बिच्छू बनके हंसना संतों से सीख जाएं,

हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाएं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।