रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,

वही यह सृष्टि चला रहे हैं,

जो पेड़ हमने लगाए पहले,

उसी का फल अब हम पा रहे हैं,

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने....

इसी धारा से शरीर पाए,

इसी धारा में फिर सब समाये,

एक आ रहे हैं एक जा रहे हैं,

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने....

जिन्होंने भेजा जगत में जाना,

तय कर दिया लौट कर के फिर से आना,

जो भेजने वाले हैं जहां में,

वही फिर वापस बुला रहे,

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने....

बैठे हैं जो धान की बादियों में,

हैं डाल हर पत्ते में,

फूल रंग-बिरंगे खिला रहे हैं,

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।