दे दे मैया मुझको यह वर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर,

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर,

जीवन यह बीते शरण में तेरी, छूटे कभी ना यह तेरी डगर,

जीवन यह बीते शरण में तेरी, छूटे कभी ना यह तेरी डगर,

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर....

हम भले बुरे सही हम शरण हैं आपकी,

बस लगी लगन हमें एक तुम्हारे नाम की,

जागा नसीबा मिला है यह दर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

जागा नसीबा मिला है यह दर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर...

आपकी दया बिना जिंदगी बेकार है,

सुन रहा है तू मेरी यह तो तेरा प्यार है,

भक्तों की तू करती कदर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

भक्तों की तू करती कदर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर...

आपकी लगन मुझे यह असर दिखा रही,

प्रेमियों से आपके नित्य मुझे मिला रही,

तू ही तू है देखूं जिधर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

तू ही तू है देखूं जिधर सेवा तुम्हारी करूं उम्र भर,

दे दे मैया मुझको यह वर सेवा तुम्हारी करो उम्र भर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।