पड़ा हु चौखट पे तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पड़ा हूं चौखट पे तेरी,

दे दे सहारा माँ,

मझधार में है कश्ती,

दे दे किनारा माँ,

ओ माँ …. ओ माँ……….

बता दे मुझे माँ इतना,

नज़र क्यों है तूने फेरी,

ममता के इस आंचल में,

नहीं है जगह क्यों मेरी,

बचपन का प्यार फिर से,

दे दे दोबारा माँ,

मंझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ ………

खुशी के दो फूल माँ गू,

मैं भी तेरी बगिया से,

वो भी ना दे तो कह दे,

चला जाऊं दुनिया से,

खो जाऊं ऐसे जेसे,

टूटा हुआ तारा माँ ,

मंझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ ……….

सुनाऊं क्या तुझको मैया,

हाल मेरा जाने तू,

लाल बलजीत को भी,

देख पहचाने तू,

बोझ सी ये जिन्दगी अब,

नहीं है गंवारा माँ ,

मंझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ ……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।