माँ तेरा एहसान है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कमी ना तो रही जब घर तेरे आया में,

कमी ना तो रही जब घर तेरे आया में,

मालामाल होया जद तेरा गुण गाया में,

मालामाल होया जद तेरा गुण गाया में,

कमी ना तो रही जब घर तेरे आया में,

मालामाल होया जद तेरा गुण गाया में,

आगे तेरे नाम नाल मेरी पहचान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है....

मेरे उक्खे वेले मेनू किसीने सम्भालिया,

मेरे उक्खे वेले मेनू किसीने सम्भालिया,

वेख मेरे दुःख माँ तू सीने ला लिया,

वेख मेरे दुःख माँ तू सीने ला लिया,

मेरे उक्खे वेले मेनू किसीने सम्भालिया,

वेख मेरे दुःख माँ तू सीने ला लिया,

मेहेरबानी हुई मेरा चर्चा जहान हैं,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है...

मितियाँ तू चुप मेनू तखत बिठाया है,

मितियाँ तू चुप मेनू तखत बिठाया है,

जेहे मददे नु सीने नाल लाया है,

मेरे जेहे मददे नु सीने नाल लाया है,

मितियाँ तू चुप मेनू तखत बिठाया है,

मेरे जेहे मददे नु सीने नाल लाया है,

तू रखिये नित तू मेरी शान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है....

इत्ता मेरे दसिया तू साडी लगे पाल है,

इत्ता मेरे दसिया तू साडी लगे पाल है,

हर वेले रखिये तू साडी ख्याल है,

हर वेले रखिये तू साडी ख्याल है,

इत्ता मेरे दसिया तू साडी लगे पाल है,

हर वेले रखिये तू साडी ख्याल है,

जग सारा भूले साणु रखिये मान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है....

तू ही कुटी ऊँचे रानी कुण्डी अम्बे रानी तू चढ़ाई है,

तू ही कुटी ऊँचे रानी कुण्डी अम्बे रानी तू चढ़ाई है,

जो भी या सु नित मेरी बिगड़ी बनायीं है,

जो भी या सु नित मेरी बिगड़ी बनायीं है,

तू ही कुटी ऊँचे रानी कुण्डी अम्बे रानी तू चढ़ाई है,

जो भी या सु नित मेरी बिगड़ी बनायीं है,

रुतबा तेरा धरती आसमान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है,

तेरा एहसान माँ तेरा एहसान है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।