कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ,

कोई भी जमाने में हम दर्द है हम किसे जाके मन की सुनाये कहाँ,

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ...

यु तो कहने को कितने ही रिश्ते यहाँ पर सगा माँ के जैसा कोई नहीं,

हर कोई आज माँ मतलबी हो गया साथ जग में निभाता है कोई नहीं,

हाथो में है नमक माँ सभी के यहाँ जख्म अपने बता दे दिखाए कहाँ,

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ....

ना सहारा रहा बेसहारा हूँ मैं हाथ मेरा पकड़ लो मैं गिर जाऊंगा,

माँ अगर अब ना तुमने संभाला मैं गमो के अंधेरो में घिर जाऊंगा,

हसने वाले है हमारे सारे यहाँ अपने दिल की माँ जाके बताये कहाँ,

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ...

जिंदगी में बहुत सी है की गलतिया तू तो माँ है मेरी माँ खता माफ़ कर,

तू तो करुणामयी है तू ममतामयी माफ़ करके मेरी हर खता माफ़ कर,

हमने देखा नहीं है कोई और दर जाके हम अपने आंसू बहाये कहाँ,

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ,

कोई भी जमाने में हम दर्द है हम किसे जाके मन की सुनाये कहाँ,

कौन है माँ हमारा तुम्हारे सिवा तू बतादे हमे और जाए कहाँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।