जगराते का हलवा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना दिल ए लागिया ना दिल ओ लागिया,

ना दिल ए लागिया ना दिल ओ लागिया,

ना दिल ए लागिया ना दिल ओ लागिया,

ना दिल ए लागिया ना दिल ओ लागिया,

ओ जगराते दा हलवा,

जय हो..

ओ जगराते दा हलवा जीहदे मुंह लगिया,

जगराते दा हलवा जीहदे मुंह लगिया,

तेरी हो रही है जय जैकार मैया जी तेरे दरबार....

दिने बेचैनी जांदी नहीं ए राति नींदे आंदी नहीं ए,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

कइयाँ दा घरबार बसाया कइयाँ दा कारोबार बढ़ाया,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

ओ घरवाले पुछदे ने किथे तू लागिया,

घरवाले पुछदे ने किथे तू लागिया,

ओ घरवाले पुछदे ने किथे तू लागिया,

घरवाले पुछदे ने किथे तू लागिया,

ओ जगराते दा हलवा,

जय हो..

ओ जगराते दा हलवा जीहदे मुंह लगिया....

इक दूजे न फोन घुमान दे रात घूम घूम गेड़ी लैंदे,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

भेटा सुन के रात लगाई ए प्रसाद दे दौने खाइये,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

मम्मी बापू पुछ देने किथे तू बचिया,

मम्मी बापू पुछ देने किथे तू बचिया,

मम्मी बापू पुछ देने किथे तू बचिया,

मम्मी बापू पुछदे ने किथे तू बचिया,

ओ जगराते दा हलवा,

जय हो..

ओ जगराते दा हलवा जीहदे मुंह लगिया....

जा जा के पर्चे वन देचौ की जगराते करवांदे,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

ऊँची ऊँची भेटा गांदे जयकारे मैया के लांदे,

जय जय जय जय माँ जय जय जय जय माँ,

माँ के चरना दी सेवा विच तेनु रखिया,

माँ के चरना दी सेवा विच तेनु रखिया,

माँ के चरना दी सेवा विच तेनु रखिया,

माँ के चरना दी सेवा विच तेनु रखिया,

ओ जगराते दा हलवा,

जय हो..

ओ जगराते दा हलवा जीहदे मुंह लगिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।