मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मनचाही यहाँ अपनी तकदीर लिखा जाए,

मनचाही यहाँ अपनी तकदीर लिखा जाए,

मंदिर में वैष्णव के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये……….

माता के रजिस्टर में जो भी नाम लिखाता है,

माता के रजिस्टर में जो भी नाम लिखाता है,

माता की दया ममता पहले वही पाता है,

एक बार जो सर अपना इस द्वार झुका जाए,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये……….

माँ के द्वार पे कटती है कर्मो की जंजीरे,

माँ के द्वार पे कटती है कर्मो की जंजीरे,

इस द्वार पे बनती है बिगड़ी हुई तकदीर,

जो भी सोचा ना सपनो में यहाँ आकर पा जाए,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये……….

माँ तो रोज बुलाती है तुम ही तो नहीं जाते,

माँ तो रोज बुलाती है तुम ही तो नहीं जाते,

आवाज लगाती है तुम्ही तो नहीं जाते,

एक बार बुलाओ तुम माँ दौड़ के आ जाए,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये,

मंदिर में वैष्णो के एक बार जो आ जाये…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।