करें जो नाश संकट का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

जगा दे भाग जीवन में,

जगा दे भाग जीवन में,

जगा दे भाग जीवन में,

जगा दे भाग जीवन में,

वो है अंबे मां जगदंबे,

जगा दे,

जय हो,

जगा दे,

जय हो,

जगा दे भाग जीवन में,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे....

मेरी ये जिंदगी तेरी,

मेरी हर बंदगी तेरी,

मेरी हर बंदगी तेरी,

मेरी हर बंदगी तेरी,

मेरी हर बंदगी तेरी,

बूझे दीपक जलाए जो,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे....

तेरे दर जो दुखी आते,

वो खुशियां भर के ले जाते,

वो खुशियां भर के ले जाते,

वो खुशियां भर के ले जाते,

वो खुशियां भर के ले जाते,

डरे जिससे मुसीबत यह,

वह है अंबे मां जगदंबे जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे....

मिले जिसको तेरी रहमत,

बने बिगड़ी हुई किस्मत,

बने बिगड़ी हुई किस्मत,

बने बिगड़ी हुई किस्मत,

बने बिगड़ी हुई किस्मत,

यह जग गुण गाता है जिसका,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे,

करें जो नाश संकट का,

वो है अंबे मां जगदंबे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।