गंगा मैया मे जब तक यह पानी रहे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया,

गंगा मैया मे जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

मेरे जीवन के और खेवैीया तेरे हांतो मेी है मेरी नैया,

दुनिया कुच्छ भी कहे भले कहती रहे,

मेरी पूजा तेरी ही दीवानी रहे, दीवानी रहे,

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया,

गंगा मैया मेी जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

आगी अँगने के फेरे लगाकर याद बीते दीनो की जलाकर

आई मई तेरे द्वार लिए मॅन मेी संसार

मेरे होंठो पे तेरी कहानी रहे, कहानी रहे,

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया ॥

गंगा मैया मेी जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

छुपे नारी के मॅन मेी वो सीता, जिसका जीवन अंगरो पे बिता,

मेरा जीवन तेरा तेरी रतती हू नाम,

मेरे माथे पे तेरी निशानी रहे, निशानी रहे,

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया ॥

गंगा मैया मेी जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

गंगा मैया मेी जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

गंगा मैया मेी जब तक यह पानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे, ज़िंदगानी रहे,

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।