देखो शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

मैं तो गंगा और यमुना से जल लाई,

तेरे चरण भुलाऊं मैया भर गगरी,

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

मैं तो चंपा चमेली के फूल लाई,

भैया हार पहनाऊ मैं लर तिलरी,

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

मैं तो लॉग इलायची के वीणा लाई,

मैं तो तुम्हें चढ़ाऊ सग मैं पान सुपारी,

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

मैं तो हलवा पूड़ी और सब्जी लाई,

तेरा भोग लगाऊ मैं भर थाली,

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

मैं तो ढोलक मजीरा चिंमटा लाई,

तेरे भजन सुनाऊ बजाए ताली,

देखो हमरी शेरावाली मैया बड़ी सुंदरी,

वो तो शेर चढ़ आवे हमारी नगरी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।