मैया कितनी है दूरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को टीका पसंद है,

बिंदिया लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को झुमके पसंद है,

नथनी पहनानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

तेरी मैया को हरवा पसंद है,

माला पहनानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को चूड़ियां पसंद है,

मेहंदी लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को तगड़ी पसंद है,

गुच्छा लगाना है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को पायल पसंद है,

महावर लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को लहंगा पसंद है,

चुदरी उढानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

मेरी मैया को हलवा पसंद है,

छोले खिलाने है जरूरी बताओ मैया कितना है दूरी,

कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,

पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,

रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।