माई चली है अपने धाम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( सुने है घर आंगणा सुने है दिन रात,

आज भवानी छोड़ के चली हमारा साथ। )

माई चली है धाम अपने माई चली है धाम,

माई चली है धाम अपने माई चली है धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम……….

रोते रोते करे विदाई घड़ी ये दुःख की आयी,

रोते रोते करे विदाई घड़ी ये दुःख की आयी,

दस दिन मैया साथ में रहके हो गयी आज परायी,

दस दिन मैया साथ में रहके हो गयी आज परायी,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चली है अपने धाम मैया चली है अपने धाम,

माई चली है धाम अपने मायी चली है धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम………….

आज तुम्हारी प्यारी चांदनी बिलकुल नहीं सुहाए,

आज तुम्हारी प्यारी चांदनी बिलकुल नहीं सुहाए,

माँ अम्बे का नी अब छुड़ना हमको आज सुहाए,

माँ अम्बे का नी अब छुड़ना हमको आज सुहाए,

चंदा छुप जा रे बादल मेरी मायी चली है धाम,

चंदा छुप जा रे बादल मैया आज चली है धाम,

माई चली है धाम अपने मायी चली है धाम,

माई चली है धाम अपने मायी चली है धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम……….

सुनी सड़के सुनी गालिया सुने है चौबारे,

सुनी सड़के सुनी गालिया सुने है जयकारे,

गूंज रहे थे कल तक माता जहाँ तेरे चौबारे,

गूंज रहे थे कल तक माता जहाँ तेरे जयकारे,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चली है अपने धाम माई चली है अपने धाम,

चली है अपने धाम माई चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम.....

आंख रुहासी छायी उदासी दुखी हुए अंतर् मन,

आंख रुहासी छायी उदासी दुखी हुए अंतर् मन,

नम आँखों से संजो निरंजन होये माँ का विसर्जन,

नम आँखों से संजो निरंजन होये माँ का विसर्जन,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

माई चली है अपने धाम अपने माई चली है अपने धाम,

माई चली है अपने धाम अपने माई चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम,

चंदा छुप जा रे बादल में मैया चली है अपने धाम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।