वैष्णो रानी माता हमको बुलाये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे,

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे,

हाँ वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

हाँ वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये....

त्रिकूट पर आओ माँ के दरश पाओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पर आओ,

त्रिकूट पर आओ माँ के दरश पाओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पर आओ,

वैष्णो रानी माता हो,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

जनम जनम के दुखड़े मिटाये,

जनम जनम के दुखड़े मिटाये,

अमृत के मइया घट छलकाए,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे,

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे....

झूले पे आओ चाहे पैदल आओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पे आओ,

झूले पे आओ चाहे पैदल आओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पे आओ,

बैठी है मैया रानी हो,

बैठी है मइया दरबार सजाये,

खुशियां हम पर माता लुटाये,

खुशियां हम पर माता लुटाये,

वैष्णो रानी हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये....

लाल चुनरिया भेट में लायो,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पे आओ,

लाल चुनरिया भेट में लायो,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पे आओ,

वैष्णो रानी माता हो,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

माता का श्रृंगार रचा,

माता का श्रृंगार रचा,

मन की सारी मुरादे पाओ,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे,

आओ रे आओ रे आओ रे आओ रे.....

माँ की महिमा प्रेम से गाओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पर आओ,

माँ की महिमा प्रेम से गाओ,

आओ रे आओ भक्तो पर्वत पर आओ,

वैष्णो रानी माता हो,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

संजो निरंजन आरती गाये,

संजो निरंजन आरती गाये,

खुशियां हम पर माता लुटाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

वैष्णो रानी माता हमको बुलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये,

ज्योति कलश माँ बैठ जलाये....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।