मोरी मैया के खुल गए द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ए मोरी मैया के, शारद मैया के, दुर्गा मैया के, खुल गये द्वार,

सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

हाँ मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

अरे हाँ री सखी री चलो चले जल ढारन को,

अरे हाँ री सखी री चलो चले जल ढारन को,

अरे हाँ री सखी री चलो चले जल ढारन को,

अरे हाँ री सखी री चलो चले जल ढारन को,

ओ मोरी मैया के, शारद मैया के, दुर्गा मैया के, खुल गये द्वार,

सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को.....

अरे हां री सखी री भोर भये स्नान करो,

अरे हां री सखी री भोर भये स्नान करो,

जगदम्बा भवानी शारदा माँ को ध्यान धरो,

जगदम्बा भवानी शारदा माँ को ध्यान धरो,

अरे हाँ री सखी री भोर भये स्नान करो,

जगदम्बा भवानी शारदा माँ को ध्यान धरो,

आयो आयो हाँ आयो आयो हो आयो आयो,

नवरात्रि त्यौहार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को.....

अरे ऊँची पहाड़िया में भक्तजनो की भीड़ लगी,

अरे ऊँची पहाड़िया में भक्तजनो की भीड़ लगी,

मय्यर वाली शारदा मैया के मंदिर में धूम मची,

मय्यर वाली शारदा मैया के मंदिर में धूम मची,

अरे ऊँची पहाड़िया में भक्तजनो की भीड़ लगी,

मय्यर वाली शारदा मैया के मंदिर में धूम मची,

सुनी महिमा हाँ सुनी महिमा और सुनी महिमा है अपरम्पार,

सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को....

मन माने ना गुनहियाँ घंटा बजे महारानी के,

मन माने ना भैया घंटा बजे महारानी के,

रही हाँ मोरी गुन्हिया झंडा उड़े माँ भवानी के,

रही हाँ मोरी गुन्हिया झंडा उड़े माँ भवानी के,

मन माने ना भैया घंटा बजे महारानी के,

रही हाँ मोरी गुन्हिया झंडा उड़े माँ भवानी के,

थाणे अर्जी हाँ थाणे अर्जी हो थाणे अर्जी करे नर नार,

सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को....

अरे हाँ मोरी गुन्हिया सीढिया चढ़त देवी मिलजे है,

अरे हाँ मोरी गुन्हिया सीढिया चढ़त देवी मिलजे है,

मैया पर्वत वासिनी जन्मो के दुःख हर ले है,

मैया पर्वत वासिनी जन्मो के दुःख हर ले है

अरे हाँ मोरी गुन्हिया सीढिया चढ़त देवी मिलजे है,

मैया पर्वत वासिनी जन्मो के दुःख हर ले है,

संजो आरती बिंदु आरती संजो आरती लाइयो उतार,

सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

री मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को,

री मोरी मैया के खुल गये द्वार सखी री चलो चले जल ढारन को.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।