चुनरी चढ़ाओ माँ को धीरे धीरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय अम्बे वाली की जय जय जय खप्पर वाली की जय..

चुनरी चढ़ाओ माँ को धीरे धीरे मेहँदी लगाओ माँ को धीरे धीरे,

चुनरी चढ़ाओ माँ को धीरे धीरे मेहँदी लगाओ माँ को धीरे धीरे,

माँ का श्रृंगार प्यारा लगे, माँ का दरबार बड़ा प्यारा लगे,

चुनरी चढ़ाओ माँ को धीरे धीरे मेहँदी लगाओ माँ को धीरे धीरे,

चुनरी चढ़ाओ माँ को धीरे धीरे मेहँदी लगाओ माँ को धीरे धीरे,

माँ का श्रृंगार प्यारा लगे, माँ का दरबार प्यारा लगे....

जम्मू ऊँचे पर्वत पे वैष्णो रानी, महीयर पे बैठी शारदा भवानी,

विंध्यांचल में बैठी विंध्यांचल रानी, काली खोह अष्ट भुजी कल्याणी,

जम्मू ऊँचे पर्वत पे वैष्णो रानी, महीयर पे बैठी शारदा भवानी,

विंध्यांचल में बैठी विंध्यांचल रानी, काली खोह अष्ट भुजी कल्याणी,

माँ का अद्भुत ये नजारा लगे,

माँ का दरबार प्यारा लगे.....

नवरात्रो में मेरी मैया रानी घर घर कृपा देती कल्याणी,

ऊँचे पहाड़ो से चल कर के दौड़ी दौड़ी आती दुर्गा भवानी,

नवरात्रो में मेरी मैया रानी घर घर कृपा देती कल्याणी,

ऊँचे पहाड़ो से चल कर के दौड़ी दौड़ी आती दुर्गा भवानी,

माँ की किरपा का ये सहारा लगे,

माँ का दरबार प्यारा लगे....

सोने का मुकुट माँ के सर सोहे गले का हार माँ का मन मोहे,

ऐसी दिव्य झांकी मेरी माँ की देवेंद्र तेरा रस्ता जोहे,

सोने का मुकुट माँ के सर सोहे गले का हार माँ का मन मोहे,

ऐसी दिव्य झांकी मेरी माँ की देवेंद्र तेरा रस्ता जोहे,

माँ के चरणों में बस गुजरा लगे,

माँ का दरबार प्यारा लगे,

माँ का दरबार प्यारा लगे,

माँ का दरबार प्यारा लगे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।