अम्बे माँ झूले भवन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले भवन में...

है नवरातो का दौर धरा पे छा रही है हरियाली,

लगे बोल न पपीहा मोर कुक रही कोयलिया काली,

है नवरातो का दौर धरा पे छा रही है हरियाली,

लगे बोल न पपीहा मोर कुक रही कोयलिया काली,

आई सुखो की नयी बहारे आई सुखो की नयी बहारे,

दुःख को सब भूले भवन में,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले....

सरस्वती और शिव शंकर का डमरू वीणा बाज रहे,

वामन भैरो छप्पन कलुआ ठुमक ठुमक के नाच रहे,

सरस्वती और शिव शंकर का डमरू वीणा बाज रहे,

वामन भैरो छप्पन कलुआ ठुमक ठुमक के नाच रहे,

फूल बरस रहे देव लोक से फूल बरस रहे देव लोक से,

देव समाये ना फुले भवन में,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले....

शीतल मंद हवा के झोके चल रहे होले होले होले रे,

बरखा रानी बरसे थम थम अपना घूँघट खोले रे,

शीतल मंद हवा के झोके चल रहे होले होले होले रे,

बरखा रानी बरसे थम थम अपना घूँघट खोले रे,

नाच रहे माँ के दीवाने मटका मटका कुले,

भवन में भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले……….

कहे अनाड़ी जश्न मनाया नभ में दसो दिशाओ ने,

जयकारे माता के बोले मिलकर मस्त फिजाओ में,

कहे अनाड़ी जश्न मनाया नभ में दसो दिशाओ ने,

जयकारे माता के बोले मिलकर मस्त फिजाओ में,

ऐसे में ऐ लक्खा तू भी ऐसे में ऐ लक्खा तू भी,

चरण मईया के छू ले भवन में,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,

भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।