शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( तू जग जननी मात ज्वाला तेरे ही कर्म से दुनिया में उजाला,

शेरावालिये नी माये शेरावालिये नी माये ज्योतावलिये,

शेरावालिये नी माये ज्योतावलिये। )

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ,

दर तेरे आया हूँ दर तेरे आया हूँ,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ……..

ऊँचे पहाड़ा बीच बैठी मेरी माये दुनिया दे रंग बनाये,

दुनिया दे रंग बनाये दुनिया दे रंग बनाये,

ओके नी संग दा बन बन के टोली मुँह मंगिया मुरदा पान दे,

माँ मेरी झोली है भर दी, दिलाना जो माँगन आवे,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ……..

झोली है खाली तन पे ना कपड़ा तेरे तो माँगन मै आया,

माये मेरी तेरे तो माँगन मै आया,

हाथ जोड़ के माँ अरजा है करदा मेरी डूब दी नैया बचा ले,

तेरे हाथ डोर नी माये मेरी जा चढ़ जा पार लगा ले,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ……..

मेरिया नसीबा वाले बूहे तू खोले,

आज खोल भावे कल खोल,

मेरिया हालता ते दुनिया है हसदी क्यों छड्ड गई माँ मेरी मैनु,

हाल दिल दा माँ तैनू सुनावा होर सुनावा केहनु,

शेरावालिये नी मेरिये माइये दर तेरे आया हूँ……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।