है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला,

कहा जा छुपा है मेरे मुरली वाला,

है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला......

तूँ आंखों में मेरी सदा बस रहा है,

तू धड़कन है दिल में सदा बज रहा है,

है आंखों का मेरी तू ही एक उजाला,

कहा जा छुपा है मेरे मुरली वाला,

है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला......

मैं सोया करूँ तो दिखे तू ही तू है,

मैं जागा करूँ तो लगे तू ही तू है,

है सपनो में मेरे तू ही आने वाला,

कहा जा छुपा है मेरे मुरली वाला,

है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला......

रे तुझको बुलाते हैं पर क्यो ना आता,

अरे प्यास नैनो की क्यो ना बुझाता,

ये ‘राजेन्द्र’ सुनता था तू है दयाला,

कहा जा छुपा है मेरे मुरली वाला,

है सिर पे मुकुट कंठ बैजंती माला......

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।