मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ गई है मैया गली गली में शोर,

मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....

इधर घूमाए चाहे उधर घूमाए,

जिस ओर चाहे मैया मुझको नचाए,

नाच रही मैं ऐसे जैसे बन में नाचे मोर,

मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....

जिससे भी चाहे मैया पैच लड़ाए,

पास बुलाए चाहे दूर भगाएं,

कटु या वापस आऊ मेरा चले ना कोई जोर,

मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर...

रंग बिरंगी मां ने मुझको बनाया,

सुख और दुख का है मेल कराया,

मां के हाथ में डोरी वह ले ले जिसकी ओर,

मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....

दूर गगन में मैं तो उड़ती ही जाऊं,

डर लगता है कहीं कट नहीं जाऊं,

रास्ता नहीं सूझे चहू नीला घनघोर,

मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।