ऐसी गुरां ने पिलाई सानू होश ना रही

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॥ पावन पाठ ॥

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही,

सानू होश ना रही सानू होश ना रही.....

सतगुरु दे दे भर भर प्याला,

पी के होवे मन मतवाला,

ऐसी मस्ती चढ़ाई सानु होश ना रही,

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही.....

सतगुरु दे दे भर भर जाम,

गुरुमुख पीदे सुबह शाम,

ऐसी लगन लगाई सानु होश ना रही,

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही.....

सतगुरु चारों ओर अंधेरा,

चानन कीता चार चफेरा,

ऐसी रोशनी दिखाई सानु होश ना रही,

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही.....

तेरी नजर ने मन मेरा रंगिया,

सब कुछ देता जो जो मंगिया,

ऐसी दया बरसाई सानु होश ना रही,

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही.....

सतगुरु मेरे दीनदयाल,

सानू कीता उसने निहाल,

ऐसी राह दिखाई सानु होश ना रही,

ऐसी गुरां ने पिलाई मैनु होश ना रही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।