पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है,

सबसे निराला, सबसे निराला,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

शीश भोले के जटा विराजे,

जटा में गंगा कि धार, धार में जगत नहाता है,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

गले भोले के सर्पो की माला,

माथे पे चंदा तिलक जगत उजियारा फैलाता है,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

अंग भबुती तन बाघमबर,

सुन डमरु की तान वो सारे जग को नचाता है,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

संग भोले के गौरा विराजे

गोदी में गणपत लाल वो सबके कष्ट मिटाता है,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

करता है बैलो की सवारी,

पर्वत ऊपर वास सारे जग से निराला है,

पार्वती तेरा भोला जगत में सबसे निराला है...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।